Monday, August 8, 2016

तुम और WhatsApp ..



हाँ waiting पर है कुछ एहसास भरे लफ्ज़
ज़रा check भी कर लिया करो
हमेशा तुम्हारे एक जवाब पर चार उम्मीदों के सवाल और रख लिए जाते हैं
मज़ाक में ही सही .. और कभी तुम किसी एक का जवाब देकर टाल जाते हो
नज़रे बार बार Last Seen का Scene देखा करती है
मसरूफ़ रहना भी कोई तुम से सीखें
जब वो दो √ के निशान नीले हो जाते है
और कोई जवाब नहीं
दिल बेचैन हो उठता हैं
अजीब अजीब सवाल टकराते है आपस में ज़हन की चार दीवारी से
और जब online होकर भी कोई reply नहीं आता
तो फिर ग़ुस्सा आता हैं
यूँ जी में आता है सारे शैतान चेहरे वाले smiley भेज दू
फिर एक नज़र होकर गुज़रती है उस profile pic से
सारे गिले-शिकवे ठन्डे हो जाते है
कितनी प्यारी तस्वीर हैं
देखो दुनिया बदले मगर इसे न बदलना....

Tuesday, August 2, 2016

तू नहीं जो अब ...



तू नहीं जो अब
तारों से भरा आसमां खाली नज़र आता है
हवा तेज़ी से गुज़रती है मगर
उसका मुझे छुना कुछ महसुस नहीं कराता
अब डर नहीं लगता
जो डर तुझे खोने का था तू साथ ले गया है
ज़मीं पर कोई रास्ता हक़ीक़त नहीं लगता
जहाँ से शुरू किया था चलना कभी
वही आकर क़दम ठहर जाते है
नींद आँखों में नहीं
और
सपने आने से पहले ही सो जाते है
ये खिड़की पर हवा से लड़ता हुआ पर्दा
जो कभी गहरे रंग का था
फिंका नज़र आने लगा है
बरसातों में भीग जाया करता था अक्सर
अबके बारिश जो गई सब रंग ले गई
उस फिश पॉट में तैरती सी मछली
अकेली सी हो गई है
कोई साथी चला गया है उसका
चादरें बदली जाती है उस बेड की बिना वजह
कोई सोता नहीं धूल के सिवा
आराम खुर्ची बोहोत काम करने लगी है
एक ऐसे इंतज़ार में रात भर जुम्बिश करती है
जिसका कोई मुकम्मल सिरा नहीं
वक़्त तो गुज़रता है
लेकिन
वो पल यूँ ही थम गए है
तू नहीं जो अब ...