Tuesday, August 2, 2016

तू नहीं जो अब ...



तू नहीं जो अब
तारों से भरा आसमां खाली नज़र आता है
हवा तेज़ी से गुज़रती है मगर
उसका मुझे छुना कुछ महसुस नहीं कराता
अब डर नहीं लगता
जो डर तुझे खोने का था तू साथ ले गया है
ज़मीं पर कोई रास्ता हक़ीक़त नहीं लगता
जहाँ से शुरू किया था चलना कभी
वही आकर क़दम ठहर जाते है
नींद आँखों में नहीं
और
सपने आने से पहले ही सो जाते है
ये खिड़की पर हवा से लड़ता हुआ पर्दा
जो कभी गहरे रंग का था
फिंका नज़र आने लगा है
बरसातों में भीग जाया करता था अक्सर
अबके बारिश जो गई सब रंग ले गई
उस फिश पॉट में तैरती सी मछली
अकेली सी हो गई है
कोई साथी चला गया है उसका
चादरें बदली जाती है उस बेड की बिना वजह
कोई सोता नहीं धूल के सिवा
आराम खुर्ची बोहोत काम करने लगी है
एक ऐसे इंतज़ार में रात भर जुम्बिश करती है
जिसका कोई मुकम्मल सिरा नहीं
वक़्त तो गुज़रता है
लेकिन
वो पल यूँ ही थम गए है
तू नहीं जो अब ...

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